अहम् ब्रह्मास्मि | Aham Brahmāsmi

by Aditya Tripathi
Aham Brahmāsmi (अहम् ब्रह्मास्मि)

अहम् ब्रह्मास्मि का शाब्दिक अर्थ है – मैं ही ब्रह्म हूँ । ‘अहम् ब्रह्मास्मि’ यजुर्वेद के बृहदारण्यक उपनिषद् का महावाक्य है।

The literal meaning of Aham Brahmāsmi is – I am Brahma. The ‘Aham Brahmāsmi’ is the Mahāvākya of the Brihadaranyaka Upanishad of the Yajur veda.

अगर इस महावाक्य को संधि विच्छेद कर के देखें तो इसके अनेक भावार्थ प्रकट होते हैं।
If we see this Mahāvākya by splitting the words, then there are many manifestations of it.

अहम्

शब्दार्थ -> मैं
मैं शब्द यहाँ पर तीन चीजों को सम्बोधित कर रहा है; – शरीर, मन, और आत्मा।

Meaning – I, Self
Here I is referred for the body, for the Mind and also for the Soul or the Real Self.

ब्रह्मास्मि -> ब्रह्म + अस्मि 

ब्रह्म

वेद परम्परा के अनुसार, ब्रह्म इस सारे विश्व का परम सत्य है और जगत का सार है। यह वो ऊर्जा है जिसके कारण यह सम्पूर्ण विश्व की उत्पत्ति होती है, यही इस विश्व का कारण है। वो निराकार, अनन्त, नित्य और शाश्वत है। प्रायः मनुष्य ब्रह्म को ईश्वर समझ लेता है और अपनी परिकल्पना से उसको आकार दे देता है।

According to the Veda tradition, Brahma is the absolute truth of this whole world and the essence of the world. That is the energy due to which this entire world is created, That is the reason of this world. That is Formless, Infinite, Eternal and Perpetual. Often, man considers Brahma as God and gives shape to it through his vision.

अस्मि

अस्मि का अर्थ है – ‘हूँ’
*अस क्रिया का पहला व्यक्ति एकवचन वर्तमान काल

The word Asmi means – ‘ am’ or ‘to be’
the first-person singular present tense of the verb as (अस्)

व्याख्या | Interpretation

अहम् ब्रह्मास्मि का भावार्थ इस पर निर्भर करता है कि आप अहम् से किसको सम्बोधित कर रहे हैं। मैं ही ब्रह्म हूँ। हमारे शरीर में वही ऊर्जा है जिससे इस विश्व की उत्पत्ति हुई है। सभी प्राणी, वस्तु आदि सब उसी ब्रह्म का ही भाग है।
जो भी चीज़ हम पाना चाहते हैं – सुख, शांति, बल, प्रेम आदि वह सब उसी ब्रह्म का ही भाग है और वह सब हमारे भीतर है। जिस तरह ब्रह्म सत्य है उसी तरह हम सत्य है और यह विश्व सत्य है।

हमें अपने आपको जानना होगा। अपने आपको जानने के कई स्तर होते हैं –

  • पहली अवस्था वह है जब हमें इस बात का बोध ही नहीं है की हमारा कोई अस्तित्व भी है। यह वह अवस्था है जब हम अचैतन्य होते हैं। जिस समय मनुष्य जन्म लेता है अथवा सोता है तब वह इसी अवस्था में होता है।
  • दूसरी अवस्था वह है जब हम यह तो जानते हैं कि हमारा कोई अस्तित्व है परंतु हमारा क्या अस्तित्व है इस बात की कल्पना नहीं कर पाते। प्रायः जब मनुष्य जब स्वप्न देखता है तब वह इसी अवस्था में होता है। जितने भी अन्य जीव है इस धरती पर वह सब इसी अवस्था में होते है।
  • तीसरी अवस्था वह है जब हम इस बात को अपनी बुद्धि से समझ सकते हैं कि हमारा अस्तित्व क्या है। इसी को चैतन्य अवस्था कहते हैं। मनुष्य अपने दिनचर्या को इसी अवस्था में करता है। वह जाग्रत रहता है। उसे पता होता है कि कब क्या करना है। वह बुद्धि का इस्तेमाल करता है। उसे अपने शरीर का, अपने मन का और अपने आस पास का ज्ञान होता है।
  • फिर वह अवस्था आती है जब हमें यह ज्ञात होता है कि हमारा क्या अस्तित्व है और साथ में यह भी कि मैं ही वह अस्तित्व हूँ। मैं ही हर जगह व्याप्त हूँ। मैं ही ब्रह्म हूँ। मैं यह शरीर, मन या बुद्धि ना हो कर मैं ही आत्मा हूँ।
  • अंत में ब्रह्म की अवस्था आती है, जब हमें यह बोध होता है कि सिर्फ़ मैं ही हूँ। मैं ही सत्य हूँ। यह एकता की अवस्था है और यही सत्य है।

The meaning of Aham Brahmāsmi depends on whom you are addressing with ‘Aham’ (I). I am the Brahma. I am the Absolute Truth. We have the same energy inside us from which this world originated. All the things are the part of the same Brahma.

We have to know ourselves. There are many levels of awareness-

  • The first stage is when we do not even realize that we have any existence. This is the state when we are unconscious. The moment a person is born or sleeps, then he is in this state. He does not aware of anything at all.
  • The second stage is when we know that we have an existence, but we cannot imagine what our existence is. Often, when a man dreams, he is in this state. All other creatures are on this earth are in this state.
  • The third stage is when we can understand with our intelligence what our existence is. This is called the state of Consciousness.  Man performs his routine in this state. He stays awake. He knows what to do when. He uses intelligence. He has knowledge of his body, his mind and his surroundings.
  • Then comes the stage when we come to know what our existence is and also that I am that existence. I am prevalent everywhere. I am the Brahma. I am not a body, mind or intellect, but I am a soul.
  • Finally comes the state of Brahma, when we realize that I am the only one. I am the Absolute Truth. This is a state of unity and this is the only truth.

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