अधिक मास 2026: पुरुषोत्तम मास क्या है, महत्व, कथा, पूजा और नियम

- Aditya Tripathi
- May 13, 2026


जब हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है, तब उसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। सनातन धर्म में इसे भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना गया है, जिसमें पूजा, दान, भक्ति और आत्मशुद्धि का विशेष महत्व बताया गया है।
अधिक मास केवल धार्मिक परंपरा भर नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन, सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति का भी अवसर माना जाता है। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में यह महीना व्यक्ति को ईश्वर भक्ति, मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन की ओर प्रेरित करता है।
कई लोगों के मन में प्रश्न आता है कि अधिक मास क्या होता है, पुरुषोत्तम मास का महत्व क्या है, इस दौरान क्या करना चाहिए और विवाह जैसे शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते। इस लेख में आपको अधिक मास 2026 से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी सरल हिंदी में मिलेगी।
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| दूसरा नाम | पुरुषोत्तम मास / मलमास |
| समर्पित | भगवान विष्णु |
| कितने समय बाद आता है | लगभग 32 महीने 16 दिन बाद |
| मुख्य उद्देश्य | भक्ति, दान और आत्मशुद्धि |
| क्या विवाह होते हैं | सामान्यतः नहीं |
| क्या पूजा विशेष मानी जाती है | हाँ |
| प्रसिद्ध मंत्र | ॐ नमो भगवते वासुदेवाय |
अधिक मास हिंदू पंचांग का अतिरिक्त महीना होता है, जो लगभग हर 32 महीने 16 दिन बाद आता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है।
हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है जबकि सौर वर्ष सूर्य की गति के अनुसार चलता है। चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है।
इसी अधिक मास को पुरुषोत्तम मास और मलमास भी कहा जाता है।
अधिक मास 2026 की शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और इसका समापन 15 जून 2026 को होगा। वर्ष 2026 में यह “अधिक ज्येष्ठ मास” के रूप में मनाया जाएगा।
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| अधिक मास प्रारंभ | 17 मई 2026 (शनिवार) |
| अधिक मास समाप्त | 15 जून 2026 (सोमवार) |
| कुल अवधि | लगभग 30 दिन |
| अधिक मास का नाम | अधिक ज्येष्ठ मास |
| समर्पित भगवान | भगवान विष्णु |
साल 2026 विशेष माना जा रहा है क्योंकि इस वर्ष ज्येष्ठ मास दो बार आएगा - एक अधिक ज्येष्ठ मास और उसके बाद सामान्य ज्येष्ठ मास।
भगवान विष्णु द्वारा इस महीने को अपना नाम “पुरुषोत्तम” देने के कारण इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस अतिरिक्त महीने को पहले “मलमास” कहकर उपेक्षित किया जाता था। दुखी होकर यह महीना भगवान विष्णु के पास गया। तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम “पुरुषोत्तम” दिया और कहा कि यह महीना भक्ति और साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाएगा।
इसी कारण इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।
👉 विस्तृत रूप से पढ़ें: पुरुषोत्तम मास की सम्पूर्ण कथा
सनातन धर्म में अधिक मास को आत्मशुद्धि, तपस्या और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का विशेष समय माना जाता है।
आज के समय में जब व्यक्ति मानसिक तनाव और व्यस्त जीवनशैली से घिरा रहता है, तब पुरुषोत्तम मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का महीना नहीं बल्कि आत्मचिंतन और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का भी अवसर बन सकता है।
स्कंद पुराण, पद्म पुराण और नारद पुराण में पुरुषोत्तम मास का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में किया गया भक्ति कार्य सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पुण्य प्रदान करता है।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
यह मंत्र भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पवित्र मंत्र माना जाता है।
अधिक मास को भक्ति, दान और साधना का विशेष समय माना गया है। इस दौरान कुछ धार्मिक कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
“ॐ विष्णवे नमः”
अधिक मास में दान का विशेष महत्व माना गया है।
अधिक मास में धार्मिक ग्रंथ पढ़ना शुभ माना जाता है।
👉 पढ़ें: अधिक मास में क्या करें और क्या नहीं
| कार्य | परंपरागत मान्यता |
|---|---|
| विवाह | टाला जाता है |
| गृह प्रवेश | सामान्यतः नहीं किया जाता |
| मुंडन संस्कार | टाला जाता है |
| नया व्यवसाय | कई लोग शुभ समय बाद शुरू करते हैं |
अधिक मास को आध्यात्मिक साधना और भक्ति का समय माना जाता है, इसलिए पारंपरिक रूप से विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार अतिरिक्त महीने को कोई सम्मान नहीं देता था। दुखी होकर वह भगवान विष्णु के पास गया। तब भगवान विष्णु ने उसे अपना नाम “पुरुषोत्तम” दिया और उसे सबसे पवित्र महीनों में स्थान प्रदान किया। इसी कारण इस महीने को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त महीना माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास की कथा पढ़ना और सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है।
👉 पढ़ें: पुरुषोत्तम मास की सम्पूर्ण कथा
| मंत्र | महत्व |
|---|---|
| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय | विष्णु कृपा हेतु |
| ॐ विष्णवे नमः | मानसिक शांति हेतु |
| विष्णु सहस्रनाम | आध्यात्मिक उन्नति हेतु |
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में किया गया दान अत्यंत फलदायी माना जाता है।
चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच समय अंतर को संतुलित करने के लिए अधिक मास जोड़ा जाता है।
| कैलेंडर | अवधि |
|---|---|
| चंद्र वर्ष | लगभग 354 दिन |
| सौर वर्ष | लगभग 365 दिन |
दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। यही अंतर लगभग 3 वर्षों में एक महीने के बराबर हो जाता है, इसलिए अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है।
असल में दोनों एक ही हैं।
“मलमास” पुराना नाम था, लेकिन भगवान विष्णु द्वारा स्वीकार करने के बाद इसे “पुरुषोत्तम मास” कहा जाने लगा।
अधिक मास या पुरुषोत्तम मास केवल एक अतिरिक्त महीना नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह महीना व्यक्ति को धर्म, दान और साधना की ओर प्रेरित करता है।
यदि श्रद्धा और सकारात्मक भावना से इस महीने में पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान किया जाए, तो इसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
सनातन परंपरा में पुरुषोत्तम मास व्यक्ति को यह संदेश देता है कि जीवन की व्यस्तताओं के बीच भी आत्मिक शांति और ईश्वर भक्ति के लिए समय निकालना आवश्यक है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कई लोग अधिक मास में बाल कटवाने जैसे कार्यों से बचते हैं, हालांकि यह पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है।
कुछ लोग अधिक मास में संपत्ति खरीदना टालते हैं, जबकि कई लोग सामान्य कार्य जारी रखते हैं।
अलग-अलग परंपराओं में मत भिन्न हो सकते हैं। कई लोग इस दौरान बड़े शुभ कार्यों को टालते हैं।
हाँ, अधिक मास में मंदिर दर्शन, पूजा और भक्ति को अत्यंत शुभ माना गया है।
सामान्य जीवन और आवश्यक कार्य जारी रखे जा सकते हैं, हालांकि कई लोग बड़े शुभ कार्यों को टालते हैं।
अधिक मास लगभग हर 32 महीने 16 दिन बाद आता है।
हाँ, महिलाएं भी पूर्ण श्रद्धा से पूजा, पाठ और व्रत कर सकती हैं।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” को अत्यंत शुभ और प्रभावशाली मंत्र माना जाता है।
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