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अधिक मास 2026: पुरुषोत्तम मास क्या है, महत्व, कथा, पूजा और नियम

जब हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है, तब उसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। सनातन धर्म में इसे भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना गया है, जिसमें पूजा, दान, भक्ति और आत्मशुद्धि का विशेष महत्व बताया गया है।

अधिक मास केवल धार्मिक परंपरा भर नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन, सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति का भी अवसर माना जाता है। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में यह महीना व्यक्ति को ईश्वर भक्ति, मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन की ओर प्रेरित करता है।

कई लोगों के मन में प्रश्न आता है कि अधिक मास क्या होता है, पुरुषोत्तम मास का महत्व क्या है, इस दौरान क्या करना चाहिए और विवाह जैसे शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते। इस लेख में आपको अधिक मास 2026 से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी सरल हिंदी में मिलेगी।

विषय सूची

  1. अधिक मास क्या होता है?
  2. अधिक मास 2026 कब है?
  3. पुरुषोत्तम मास क्यों कहा जाता है?
  4. अधिक मास का धार्मिक महत्व
  5. शास्त्रों में अधिक मास का महत्व
  6. अधिक मास में क्या करें?
  7. अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए?
  8. अधिक मास में शादी क्यों नहीं होती?
  9. पुरुषोत्तम मास कथा
  10. अधिक मास पूजा विधि
  11. अधिक मास में कौन से मंत्र बोलें?
  12. अधिक मास में दान का महत्व
  13. अधिक मास का वैज्ञानिक कारण
  14. अधिक मास और मलमास में अंतर
  15. FAQ

अधिक मास एक नजर में

विषयजानकारी
दूसरा नामपुरुषोत्तम मास / मलमास
समर्पितभगवान विष्णु
कितने समय बाद आता हैलगभग 32 महीने 16 दिन बाद
मुख्य उद्देश्यभक्ति, दान और आत्मशुद्धि
क्या विवाह होते हैंसामान्यतः नहीं
क्या पूजा विशेष मानी जाती हैहाँ
प्रसिद्ध मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवाय

अधिक मास क्या होता है?

अधिक मास हिंदू पंचांग का अतिरिक्त महीना होता है, जो लगभग हर 32 महीने 16 दिन बाद आता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है।

हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है जबकि सौर वर्ष सूर्य की गति के अनुसार चलता है। चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है।

इसी अधिक मास को पुरुषोत्तम मास और मलमास भी कहा जाता है।

अधिक मास 2026 कब है?

अधिक मास 2026 की शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और इसका समापन 15 जून 2026 को होगा। वर्ष 2026 में यह “अधिक ज्येष्ठ मास” के रूप में मनाया जाएगा।

अधिक मास 2026 तिथि

जानकारीविवरण
अधिक मास प्रारंभ17 मई 2026 (शनिवार)
अधिक मास समाप्त15 जून 2026 (सोमवार)
कुल अवधिलगभग 30 दिन
अधिक मास का नामअधिक ज्येष्ठ मास
समर्पित भगवानभगवान विष्णु

साल 2026 विशेष माना जा रहा है क्योंकि इस वर्ष ज्येष्ठ मास दो बार आएगा - एक अधिक ज्येष्ठ मास और उसके बाद सामान्य ज्येष्ठ मास।

पुरुषोत्तम मास क्यों कहा जाता है?

भगवान विष्णु द्वारा इस महीने को अपना नाम “पुरुषोत्तम” देने के कारण इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस अतिरिक्त महीने को पहले “मलमास” कहकर उपेक्षित किया जाता था। दुखी होकर यह महीना भगवान विष्णु के पास गया। तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम “पुरुषोत्तम” दिया और कहा कि यह महीना भक्ति और साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाएगा।

इसी कारण इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

👉 विस्तृत रूप से पढ़ें: पुरुषोत्तम मास की सम्पूर्ण कथा

अधिक मास का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में अधिक मास को आत्मशुद्धि, तपस्या और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का विशेष समय माना जाता है।

इस महीने का महत्व क्यों बढ़ जाता है?

  • भगवान विष्णु की पूजा का विशेष फल मिलता है
  • जप, तप और दान कई गुना फलदायी माने जाते हैं
  • आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ समय माना जाता है
  • मन और आत्मा की शुद्धि का अवसर मिलता है

आज के समय में जब व्यक्ति मानसिक तनाव और व्यस्त जीवनशैली से घिरा रहता है, तब पुरुषोत्तम मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का महीना नहीं बल्कि आत्मचिंतन और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का भी अवसर बन सकता है।

शास्त्रों में अधिक मास का महत्व

स्कंद पुराण, पद्म पुराण और नारद पुराण में पुरुषोत्तम मास का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में किया गया भक्ति कार्य सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पुण्य प्रदान करता है।

प्रसिद्ध मंत्र

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

यह मंत्र भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पवित्र मंत्र माना जाता है।

अधिक मास में क्या करें?

अधिक मास को भक्ति, दान और साधना का विशेष समय माना गया है। इस दौरान कुछ धार्मिक कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है।

1. भगवान विष्णु की पूजा करें

  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
  • गीता पढ़ें
  • तुलसी पूजन करें
  • सुबह-शाम दीपक जलाएं

2. मंत्र जाप करें

विष्णु मंत्र

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

श्री हरि मंत्र

“ॐ विष्णवे नमः”

3. दान करें

अधिक मास में दान का विशेष महत्व माना गया है।

क्या दान करें?

  • अन्न
  • वस्त्र
  • घी
  • फल
  • धार्मिक पुस्तकें

4. सात्विक जीवन अपनाएं

  • क्रोध से बचें
  • नशे से दूर रहें
  • सात्विक भोजन करें
  • नकारात्मक विचारों से बचें

5. धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें

अधिक मास में धार्मिक ग्रंथ पढ़ना शुभ माना जाता है।

कौन से ग्रंथ पढ़ें?

  • भगवद्गीता
  • विष्णु पुराण
  • रामचरितमानस
  • श्रीमद्भागवत

👉 पढ़ें: अधिक मास में क्या करें और क्या नहीं

अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए?

सामान्यतः किन कार्यों से बचा जाता है?

कार्यपरंपरागत मान्यता
विवाहटाला जाता है
गृह प्रवेशसामान्यतः नहीं किया जाता
मुंडन संस्कारटाला जाता है
नया व्यवसायकई लोग शुभ समय बाद शुरू करते हैं

अधिक मास में शादी क्यों नहीं होती?

अधिक मास को आध्यात्मिक साधना और भक्ति का समय माना जाता है, इसलिए पारंपरिक रूप से विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं।

पुरुषोत्तम मास कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार अतिरिक्त महीने को कोई सम्मान नहीं देता था। दुखी होकर वह भगवान विष्णु के पास गया। तब भगवान विष्णु ने उसे अपना नाम “पुरुषोत्तम” दिया और उसे सबसे पवित्र महीनों में स्थान प्रदान किया। इसी कारण इस महीने को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त महीना माना जाता है। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास की कथा पढ़ना और सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है।
👉 पढ़ें: पुरुषोत्तम मास की सम्पूर्ण कथा

अधिक मास पूजा विधि

सुबह क्या करें?

  • स्नान करें
  • स्वच्छ वस्त्र पहनें
  • भगवान विष्णु की पूजा करें
  • तुलसी में जल अर्पित करें

शाम क्या करें?

  • दीपक जलाएं
  • विष्णु मंत्र जाप करें
  • आरती करें

अधिक मास में कौन से मंत्र बोलें?

मंत्रमहत्व
ॐ नमो भगवते वासुदेवायविष्णु कृपा हेतु
ॐ विष्णवे नमःमानसिक शांति हेतु
विष्णु सहस्रनामआध्यात्मिक उन्नति हेतु

अधिक मास में दान का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में किया गया दान अत्यंत फलदायी माना जाता है।

विशेष दान

  • अन्न दान
  • गौ सेवा
  • वस्त्र दान
  • गरीबों की सहायता
  • धार्मिक पुस्तकों का दान

अधिक मास का वैज्ञानिक कारण

चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच समय अंतर को संतुलित करने के लिए अधिक मास जोड़ा जाता है।

कैलेंडरअवधि
चंद्र वर्षलगभग 354 दिन
सौर वर्षलगभग 365 दिन

दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। यही अंतर लगभग 3 वर्षों में एक महीने के बराबर हो जाता है, इसलिए अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है।

अधिक मास और मलमास में अंतर

असल में दोनों एक ही हैं।

“मलमास” पुराना नाम था, लेकिन भगवान विष्णु द्वारा स्वीकार करने के बाद इसे “पुरुषोत्तम मास” कहा जाने लगा।

निष्कर्ष

अधिक मास या पुरुषोत्तम मास केवल एक अतिरिक्त महीना नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह महीना व्यक्ति को धर्म, दान और साधना की ओर प्रेरित करता है।

यदि श्रद्धा और सकारात्मक भावना से इस महीने में पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान किया जाए, तो इसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

सनातन परंपरा में पुरुषोत्तम मास व्यक्ति को यह संदेश देता है कि जीवन की व्यस्तताओं के बीच भी आत्मिक शांति और ईश्वर भक्ति के लिए समय निकालना आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | FAQs

1. क्या अधिक मास में बाल कटवा सकते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कई लोग अधिक मास में बाल कटवाने जैसे कार्यों से बचते हैं, हालांकि यह पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है।

2. क्या अधिक मास में मकान खरीद सकते हैं?

कुछ लोग अधिक मास में संपत्ति खरीदना टालते हैं, जबकि कई लोग सामान्य कार्य जारी रखते हैं।

3. क्या अधिक मास में सोना खरीदना शुभ होता है?

अलग-अलग परंपराओं में मत भिन्न हो सकते हैं। कई लोग इस दौरान बड़े शुभ कार्यों को टालते हैं।

4. क्या अधिक मास में मंदिर जाना चाहिए?

हाँ, अधिक मास में मंदिर दर्शन, पूजा और भक्ति को अत्यंत शुभ माना गया है।

5. क्या अधिक मास में नया काम शुरू कर सकते हैं?

सामान्य जीवन और आवश्यक कार्य जारी रखे जा सकते हैं, हालांकि कई लोग बड़े शुभ कार्यों को टालते हैं।

6. अधिक मास कितने साल में आता है?

अधिक मास लगभग हर 32 महीने 16 दिन बाद आता है।

7. क्या महिलाएं अधिक मास पूजा कर सकती हैं?

हाँ, महिलाएं भी पूर्ण श्रद्धा से पूजा, पाठ और व्रत कर सकती हैं।

8. अधिक मास में कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” को अत्यंत शुभ और प्रभावशाली मंत्र माना जाता है।

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Aditya Tripathi

Aditya Tripathi is the Founder of DigiVogue, writing about mindset, relationships, and Vedic wisdom to help readers apply practical life insights.

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