अधिक मास में क्या करें और क्या नहीं? पुरुषोत्तम मास के नियम और पूजा - DigiVogue
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अधिक मास में क्या करें और क्या नहीं? पुरुषोत्तम मास के नियम और पूजा

अधिक मास या पुरुषोत्तम मास सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान पूजा, जप, दान और आत्मचिंतन का विशेष महत्व बताया गया है।

कई लोगों के मन में प्रश्न आता है कि अधिक मास में क्या करना चाहिए, किन कार्यों से बचना चाहिए और क्या इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश या नए कार्य करना उचित होता है। इस लेख में आपको अधिक मास में क्या करें और क्या नहीं से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी सरल हिंदी में मिलेगी।

विषय सूची

  1. अधिक मास क्या होता है?
  2. अधिक मास में क्या करें?
  3. अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए?
  4. अधिक मास में कौन सी पूजा करनी चाहिए?
  5. अधिक मास में क्या खाना चाहिए?
  6. क्या अधिक मास अशुभ होता है?
  7. अधिक मास में विवाह क्यों नहीं होते?
  8. अधिक मास में दान का महत्व
  9. अधिक मास के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?
  10. FAQ

अधिक मास क्या होता है?

अधिक मास हिंदू पंचांग का अतिरिक्त महीना होता है, जो लगभग हर 32 महीने 16 दिन बाद आता है। इसे पुरुषोत्तम मास और मलमास भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है।

पुरुषोत्तम मास का धार्मिक और पौराणिक महत्व समझने के लिए इसकी कथा जानना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

👉 पढ़ें: अधिक मास 2026: महत्व, कथा, पूजा और सम्पूर्ण जानकारी

अधिक मास में क्या करें?

अधिक मास को भक्ति, साधना और आत्मशुद्धि का विशेष समय माना गया है। इस दौरान कुछ धार्मिक कार्यों को अत्यंत शुभ माना जाता है।

1. भगवान विष्णु की पूजा करें

पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

क्या करें?

  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
  • तुलसी पूजा करें
  • सुबह और शाम दीपक जलाएं
  • भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें
  • गीता पाठ करें

2. मंत्र जाप करें

अधिक मास में मंत्र जाप को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

प्रसिद्ध मंत्र

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • ॐ विष्णवे नमः
  • श्री हरि मंत्र

3. दान करें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में दान का विशेष महत्व होता है।

क्या दान कर सकते हैं?

  • अन्न
  • वस्त्र
  • फल
  • घी
  • धार्मिक पुस्तकें

4. सात्विक भोजन करें

इस दौरान सात्विक और सरल भोजन को प्राथमिकता दी जाती है।

क्या खाएं?

  • फल
  • दूध
  • दही
  • खिचड़ी
  • घर का बना हल्का भोजन

5. आत्मचिंतन और ध्यान करें

आज की व्यस्त जीवनशैली में अधिक मास मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त करने का भी अवसर माना जा सकता है।

  • ध्यान करें
  • सकारात्मक विचार रखें
  • क्रोध और नकारात्मकता से बचें
  • धार्मिक ग्रंथ पढ़ें

अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार अधिक मास में कुछ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं।

सामान्यतः किन कार्यों से बचा जाता है?

कार्यपारंपरिक मान्यता
विवाहटाला जाता है
गृह प्रवेशसामान्यतः नहीं किया जाता
मुंडन संस्कारटाला जाता है
नया व्यवसाय शुरू करनाकई लोग शुभ समय बाद शुरू करते हैं

किन बातों से बचने की सलाह दी जाती है?

  • क्रोध और विवाद
  • नशा और तामसिक भोजन
  • दूसरों की निंदा
  • नकारात्मक सोच
  • अनावश्यक दिखावा

अधिक मास में कौन सी पूजा करनी चाहिए?

पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु की पूजा को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

पूजा में क्या शामिल करें?

  • तुलसी पूजन
  • दीपदान
  • विष्णु सहस्रनाम
  • गीता पाठ
  • आरती

सुबह की पूजा

  • स्नान करें
  • स्वच्छ वस्त्र पहनें
  • भगवान विष्णु को जल अर्पित करें
  • मंत्र जाप करें

शाम की पूजा

  • दीपक जलाएं
  • आरती करें
  • भगवान विष्णु का ध्यान करें

अधिक मास में क्या खाना चाहिए?

अधिक मास में सात्विक भोजन को महत्व दिया जाता है।

सात्विक भोजन

  • फल
  • दूध
  • दही
  • सूखे मेवे
  • खिचड़ी
  • साबूदाना

किन चीजों से बचें?

  • शराब
  • मांसाहार
  • अत्यधिक तला भोजन
  • नशे वाली चीजें

क्या अधिक मास अशुभ होता है?

नहीं। अधिक मास को अशुभ नहीं बल्कि अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है।

कई लोग “मलमास” शब्द के कारण इसे अशुभ समझ लेते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह भगवान विष्णु को समर्पित विशेष महीना है।

👉 विस्तृत रूप से पढ़ें: पुरुषोत्तम मास की सम्पूर्ण कथा

अधिक मास में विवाह क्यों नहीं होते?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार अधिक मास को भक्ति और साधना का समय माना जाता है, इसलिए इस दौरान विवाह जैसे मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते।

हालांकि यह पूरी तरह आस्था और पारिवारिक मान्यताओं पर निर्भर करता है।

अधिक मास में दान का महत्व

सनातन धर्म में दान को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है और अधिक मास में इसका महत्व और बढ़ जाता है।

विशेष दान

  • अन्न दान
  • वस्त्र दान
  • गौ सेवा
  • जरूरतमंदों की सहायता
  • धार्मिक पुस्तकों का दान

दान करते समय श्रद्धा और विनम्रता का भाव रखना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।

अधिक मास के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?

महत्वपूर्ण बातें

  • धार्मिक आस्था का सम्मान करें
  • दिखावे से बचें
  • मन को शांत रखें
  • सकारात्मक विचार रखें
  • जरूरतमंदों की सहायता करें
  • नियमित पूजा और ध्यान करें

अधिक मास केवल धार्मिक नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को आत्मिक संतुलन और सकारात्मक जीवन की प्रेरणा भी देता है।

निष्कर्ष

अधिक मास या पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पवित्र महीना माना जाता है। इस दौरान पूजा, मंत्र जाप, दान, ध्यान और सात्विक जीवन को विशेष महत्व दिया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में व्यक्ति को क्रोध, नकारात्मकता और अनावश्यक विवादों से दूर रहकर भक्ति और आत्मचिंतन पर ध्यान देना चाहिए।

यदि श्रद्धा और सकारात्मक भावना से पुरुषोत्तम मास के नियमों का पालन किया जाए, तो इसे आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | FAQs

1. क्या अधिक मास में बाल कटवा सकते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कई लोग अधिक मास में बाल कटवाने से बचते हैं, हालांकि यह पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है।

2. क्या अधिक मास में मकान खरीद सकते हैं?

कुछ लोग अधिक मास में संपत्ति खरीदना टालते हैं, जबकि कई लोग सामान्य जीवन के कार्य जारी रखते हैं।

3. क्या अधिक मास में नया काम शुरू कर सकते हैं?

सामान्य जीवन और आवश्यक कार्य किए जा सकते हैं, हालांकि कई लोग बड़े शुभ कार्यों को टालते हैं।

4. क्या अधिक मास में मंदिर जाना चाहिए?

हाँ, अधिक मास में मंदिर दर्शन और भगवान विष्णु की पूजा को अत्यंत शुभ माना गया है।

5. क्या अधिक मास में व्रत रखना जरूरी है?

व्रत रखना अनिवार्य नहीं है, लेकिन श्रद्धा अनुसार व्रत और पूजा करना पुण्यदायी माना जाता है।

6. क्या अधिक मास में गीता पढ़ना शुभ होता है?

हाँ, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गीता पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।

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Aditya Tripathi

Aditya Tripathi is the Founder of DigiVogue, writing about mindset, relationships, and Vedic wisdom to help readers apply practical life insights.

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