पुरुषोत्तम मास पूजा विधि: अधिक मास में भगवान विष्णु की पूजा कैसे करें?

- Aditya Tripathi
- May 14, 2026


पुरुषोत्तम मास या अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पवित्र महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान पूजा, मंत्र जाप, दान और सात्विक जीवन का विशेष महत्व बताया गया है। कई लोग अधिक मास में भगवान विष्णु की पूजा विधि, सही नियम और पूजा सामग्री के बारे में जानना चाहते हैं।
पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी पूजन, मंत्र जाप, गीता पाठ और दान-पुण्य को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दौरान व्यक्ति को आत्मचिंतन, संयम और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने की भी प्रेरणा दी जाती है।
इस लेख में आपको पुरुषोत्तम मास पूजा विधि, सुबह और शाम की पूजा, मंत्र, दान और महत्वपूर्ण नियमों की सम्पूर्ण जानकारी सरल हिंदी में मिलेगी।
पुरुषोत्तम मास हिंदू पंचांग का अतिरिक्त महीना होता है, जो लगभग हर 32 महीने 16 दिन बाद आता है। इसे अधिक मास और मलमास भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है।
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सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास को भक्ति, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष समय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा और मंत्र जाप अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
आज की व्यस्त जीवनशैली में भी यह महीना व्यक्ति को कुछ समय आध्यात्मिक शांति और आत्मचिंतन के लिए निकालने की प्रेरणा देता है।
पुरुषोत्तम मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को स्वयं को समझने और आंतरिक शांति प्राप्त करने का अवसर भी देता है।
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पुरुषोत्तम मास की पूजा के लिए सामान्यतः निम्न सामग्री उपयोग की जाती है।
अधिक मास में सुबह की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
“ॐ विष्णवे नमः”
अधिक मास में धार्मिक ग्रंथ पढ़ना शुभ माना जाता है।
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शाम के समय भगवान विष्णु की आरती और दीपदान को शुभ माना जाता है।
| मंत्र | महत्व |
|---|---|
| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय | भगवान विष्णु की कृपा हेतु |
| ॐ विष्णवे नमः | मानसिक शांति हेतु |
| विष्णु सहस्रनाम | आध्यात्मिक उन्नति हेतु |
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में दान का विशेष महत्व बताया गया है।
दान करते समय श्रद्धा और विनम्रता का भाव सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
कई लोग पूरे पुरुषोत्तम मास में नियमित पूजा और मंत्र जाप करते हैं, जबकि कुछ लोग विशेष दिनों जैसे एकादशी या गुरुवार को विशेष पूजा करते हैं।
यह पूरी तरह व्यक्ति की श्रद्धा, समय और क्षमता पर निर्भर करता है। नियमित रूप से भगवान विष्णु का स्मरण और सकारात्मक भाव रखना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
हाँ, महिलाएं भी पूर्ण श्रद्धा और नियमपूर्वक पुरुषोत्तम मास की पूजा, पाठ और व्रत कर सकती हैं। सनातन परंपरा में भगवान विष्णु की भक्ति सभी के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण मानी गई है।
अधिक मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को आत्मिक संतुलन और सकारात्मक जीवन की प्रेरणा भी देता है।
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नहीं। व्रत रखना अनिवार्य नहीं माना जाता। व्यक्ति अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार पूजा, मंत्र जाप और व्रत कर सकता है।
कई लोग इस दौरान एक समय भोजन, फलाहार या सात्विक भोजन का पालन करते हैं।
पुरुषोत्तम मास या अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पवित्र महीना माना जाता है। इस दौरान पूजा, मंत्र जाप, दान और सात्विक जीवन को विशेष महत्व दिया जाता है।
यदि श्रद्धा और सकारात्मक भावना से भगवान विष्णु की पूजा की जाए, तो इसे मानसिक शांति, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।
सनातन परंपरा में पुरुषोत्तम मास व्यक्ति को भक्ति, संयम और सकारात्मक जीवन की ओर प्रेरित करता है।
मुख्य रूप से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
श्रद्धा अनुसार नियमित पूजा और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” को अत्यंत शुभ मंत्र माना जाता है।
हाँ, तुलसी पूजा को अत्यंत शुभ माना जाता है।
हाँ, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गीता पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।
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